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HINDI

(Three hours)


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This paper comprises of two Sections; Section A and Section B.

Attempt all the questions from Section A.

Attempt any four questions from Section B, answering at least one question each from the

two books you have studied and any two other questions.

The intended marks for questions or parts of questions are given in brackets [ ].




SECTION A (40 Marks)

Attempt all questions


Question 1
Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics :-
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए :-
[15]

(i) मनुष्य अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखता है । अपने बचपन के दिनों की किसी ऎसी सुखद घटना का वर्णन कीजिए, जिसने आपको जीवन की नयी सीख दी हो, यह सीख आपके भावी जीवन में कैसे उपयोगी सिध्द हो सकती है, इसका विवरण दीजीए ।

(ii) "काम को कल पर टालने से मन का भारीपन बढ़ता है, जबकि कल करने वाले काम को आज ही पूरा कर लेने से हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है और मनसिक सन्तोष भी प्राप्त होता है ।" बताइए कि एक विद्यार्थी के लिए समय का क्या महत्व है ?

(iii) "प्रेम से सामाजिक तथा राष्ट्रीय सम्बन्ध बढ़ते है"- प्रस्तुत पंक्ति के आधार पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए ।

(iv) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो :-
’आगे कुआँ पिछे खाई ।’

(v) निचे दिये गये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहनी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए ।
 


Question 2
Write a letter in Hindi in approximately 120 words on any one of the topics given below :-
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिये :-
[7]

(i) आपके बड़े भाइ ने अपको किसी शर्त पर एक खास भेंट देने  की बात कही थी । आप वह शर्त जीत गए हैं, उन्हें नम्रतापूर्वक शर्त की याद दिलाते हुए पत्र लिखिए ।

(ii) अपने नगर के स्वास्थ्य-अधिकारी को पत्र लिखिए जिसमें आपके क्षेत्र में फैली गंदगी तथा उसके दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित कीजिए ।

Question 3
Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own word as far as possible:-
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए । उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए:-

     काशीनरेश ने कोसल पर आक्रमण कर दिया था । कोसल के राजा की चारों ओर फैली कीर्ति उन्हें
असह्य हो गयी थी । युद्ध में उनकी विजय हुई । पराजित नरेश वन में भाग गये थे; किन्तु प्रजा उनके
वियोग मे व्याकुल थी और विजयी को अपना सहयोग नहीं दे रही थी । विजय के गर्व से मत्त काशीनरेश
प्रजा के असहयोग से क्रुद्ध हुए । शत्रु को सर्वथा समाप्त करने के लिए उन्होने घोषणा कर दी - ’जो
कोसलराज को ढूँढ़ लाएगा, उसे सौ स्वर्ण-मुद्राएं पुरस्कार मे मिलेंगी ।’
     इस घटना का कोई प्रभाव नहीं हुआ । धन के लोभ में अपने धार्मिक राजा को शत्रु के हाथ में
देने वाला अधम वहाँ कोई नहीं था ।
     कोसलराज वन में भटकते घूमने लगे । जटाएँ बढ़ गयीं । शरीर कृश हो गया । वे एक
वनवासी के समान दीखने लगे । एक दिन उन्हे देखकर एक पथिक ने पूछा - ’यह वन कितना बड़ा है ? वन
से निकलने तथा कोसल पहुँचने का मार्ग कौन-सा हैं ?’
     नरेश चौंके! उन्होंने पूछा - ’आप कोसल क्यों जा रहे हैं ?’
पथिक ने कहा - विपत्ति में पड़ा व्यापारी हूँ । माल से लदी नौका नदी में डूब चुकी है । अब
द्वार-द्वार कहाँ भिक्षा माँगता भटकता डॊलूँ । सुना है कि कोसल के राजा बहुत उदार हैं, अतः उनके
पास जा रहाँ हूँ ।’
     ’तुम दूर से आए हो वन का मार्ग बीहड़ है । चलो, तुम्हें वहाँ तक पहुँचा आऊँ ।’ कुछ देर सोचकर
राजा ने पथिक से कहा ।
     पथिक के साथ वे काशीनरेश की सभा में आए । अब उन जटाधारी को कोई पहचानता न
था । काशीनरेश ने पूछा - ’आप दोनों कैसे पधारे ?’ तब उस महत्तम ने कहा - ’मैं कोसल का राजा
हूँ । मुझे पकड़ने के लिए तुमने पुरस्कार घोषित किया है । अब पुरस्कार की वे सौ स्वर्ण-मुद्राएँ इस पथिक
को दे दो ।’
     सभा में सन्नाटा छा गया । सब बातें सुनकर काशीनरेश अपने सिंहासन से उठे और बोले -
’महाराज! आप जैसे धर्मात्म, परोपकर-निष्ठ को परजित करने की अपेक्षा उसका चरणाश्रित होने का
गौरव कहीं अधिक है । यह सिंहासन अब आपका है । मुझे अपना अनुचर स्वीकार करने की कृपा
कीजिए ।’
     व्यापारी को मुँह माँगा धन प्राप्त हुआ । कोसल और काशी उस दिन से मित्र राज्य बन गये ।
     मानव जीवन कि सार्थकता परहित के लिए बलिदान करने की भावना में निहित है । मनुष्य के
चरित्र की परिक्षा उसके परोपकारी कामों के आधार पर होती है, न कि व्यक्तिगत वैभवअर्जन पर । जो
मनुष्य सबके दुःख दूर करने में जितना प्रयत्नशील होता है, वह उतना ही सभ्य, सुसंकृत एवं उच्च
विचारों वाला माना जाता है; क्योंकि परोपकार का विशद भाव ही मानव की अन्तरात्मा की महानता की
कसौटी है ।

(i) कोसल पर आक्रमण किसने और क्यों किया था? [2]

(ii) काशीनरेश ने क्या घोषणा, क्यों कराई थी ? [2]

(iii) पथिक ने कोसलराज से क्या कहा था ? उसके कथन को सुनकर कोसलराज ने क्या निर्णय लिया ? [2]

(iv) कोसलराज को सभा में कोई क्यों न पहचान पाया था ? सभा में सन्नाटा क्यों छा गया था ? [2]

(v) प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिली ? [2]

Question 4
Answer the following according to the instructions given:-
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए:-

(i) निम्न शब्दों से विषेशण बनाइए :-
अहिंसा, दर्शन ।
[1]

(ii) निम्न शब्दों में से किसी एक शब्द के दो पर्रयायवाची शब्द लिखिए :-
उन्नति, पुत्री ।
[1]

(iii) निम्न शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए :-
सहयोग, शीतल, त्यागी, एकता ।
[1]

(iv) निम्नलिखित मुहावरों मे से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए :-
सिर नीचा होना, कान खड़े होना ।
[1]

(v) भाववाचक संज्ञा बनाइए :-
पूर्ण, प्रतिनिधि ।
[1]

Question 4
(vi) कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन किजिए :-

(a) कर्तव्य का पालन नहीं करने मे दुःख है ।
(’नही’ हटाइए, किन्तु वाक्य का अर्थ न बदले)
[1]

(b) गर्मियों की छु्ट्टियों में मैंने अपने मित्रों के साथ मसुरी घूमने का निर्णय किया ।
(रेखांकित के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कीजिए)
[1]

(c) मुसाफिर धर्मशाला में विश्राम करते हैं ।
(भूतकाल में बदलिए)
[1]


SECTION B (40 Marks)

Attempt four questions from this Section.

You must answer at least one question from each of the two books you have

studied and any two other questions.

कथा-मंजूषा


Question 5
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीच लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

कई व्यापारियों ने यत्न किया, थैलियाँ लेकर सुभागी के पास पहुँचे । मगर सुभागी ने बेपरवाही से
उनकी तरफ देखा और कहा -"यह जमीन न बेचूँगी । यहाँ मेरा स्वामी मुझे बिठा गया है | मुझे लेने
आएगा तो कहाँ ढूँढ़ेगा ? यह झोंपड़ा नहीं, तीर्थराज है । इसे बेच दूँ तो किस युग में मेरा भला होगा ?"

- प्राचीन दिल्ली का अन्तिम दीपक-

लेखक-सुदर्शन



(i) सुभागी का परिचय दीजिए । [2]

(ii) सुभागी का झोंपड़ा खरीदने के लिए कौन-सा व्यापारी सबसे अधिक उत्सुक था और क्यों ? [2]

(iii) तीर्थ किसे कहते हैं ? सुभागी को अपना झोंपड़ा तीर्थराज क्यों प्रतीत होता था । वह अपना झोंपड़ा क्यों नहीं बेचना चाहती थी । [3]

(iv) प्रस्तुत कहानी के आधार पर सिद्ध कीजिए कि आधुनिक व्यापारिक युग में जीवन मूल्यों में गिरावट आई है ? [3]

Question 6
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

ईश्वरी ने शंका निवारण की - "महात्मा गाँधी" के भक्त हैं साहब । खद्‌दर के सिवा और कुछ
पहनते ही नहीं । पुराने सारे कपड़े जला डाले । यों कहो कि राजा हैं । ढाई लाख सालाना की रियासत है,
पर आपकी सूरत देखो तो मालूम होता है, अभी अनाथालय से पकड़कर आए हैं ।"

-नशा-

लेखक-मुंशी प्रेमचंद



(i) ईश्वरी ने किसकी शंका का निवारण किया और क्यों ? [2]

(ii) ईश्वरी इस समय कहाँ हैं और क्यों ? [2]

(iii) "महात्मा गाँधी" कौन थे ? उनके भक्तों का जीवन किस प्रकार का होता है और क्यों ? [3]

(iv) ईश्वरी का यह कथन उसके व्यक्तित्व की किस विशेषता का परिचय दे रहा है ? वह मित्रधर्म का पालन कर रहा है या उल्लंघन ? तर्क-सहित उत्तर दीजिए । [3]

Question 7
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

इसी उधेड़बुन में पड़े लाला झाऊलाल छ्त पर टहल रहे थे । कुछ प्यास मालूम हुई । उन्होने नौकर
को आवाज़ दी । नौकर नहीं था, खुद उनकी पत्नी पानी लेकर आई । आप जानते हैं कि हिन्दु समाज
मे स्त्रियों की कैसी शोचनीय अवस्था है । पति नालायक को प्यास लगती है तो स्त्री बेचारी को पानी लेकर
हाज़िर होना पड़ता है ।

-अकबरी लोटा-

लेखक-अन्नपूर्णानन्द वर्मा



(i) लाला झाऊलाल किस उधेड़बुन में पड़े थे और क्यों ? [2]

(ii) झाऊलाल की पत्नी जिस लोटे में पानी लेकर आयी थी, वह लोटा उन्हें नापसंद क्यों था ? लोटे की बनावट कैसी थी ? [2]

(iii) हमारे पूर्वजों ने पानी पीने के क्या नियम बनाए थे ? झाऊलाल कहाँ खड़े होकर पानी पी रहे थे ? पानी पीते समय क्या घटना घटित हुई ? [3]

(iv) प्रस्तुत कहानी किस प्रकार की कहानी है ? इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिली ? [3]


चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य

लेखक - प्रकाश नगायच


Question 8
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"लगता है, मगध के मंत्रियों, सेनाध्यक्षों और नगरिकों ने स्वर्गीय सम्राट समुद्रगुप्त के पुत्र को
पहचानने में भूल की है ।आप लोगों ने भूल से किसी ऐसे व्यक्ति को गुप्त साम्राज्य के सिंहासन पर
बिठा दिया है, जिसके रक्त मे आर्य समुद्रगुप्त के रक्त जैसी गर्मी नहीं, जिसमे वह आन नहीं, वह पराक्रम
नहीं, जिसे अपने और अपने वंश के मान-सम्मान, मर्यादा और गौरव का कोई ध्यान नहीं ।"

(i) यह कथन किस व्यक्ति का है ? इस समय वक्ता कि मनोदशा कैसी है ? [2]

(ii) गुप्त साम्राज्य की तत्कालीन परिस्थिति किस प्रकार की थी ? [2]

(iii) इस समय वक्ता के अतिरिक्त और कौन-कौन व्यक्ति उपस्थित हैं ? वक्ता के वहाँ आने से पूर्व उनकी चर्चा का विषय क्या था ? [3]

(iv) समुद्रगुप्त कौन थे ? समुद्रगुप्त और रामगुप्त के चरित्र की तुलना कीजिए । [3]

Question 9
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"ठीक है, महाराज!" वीरसेन जैसे कुछ याद कर बोला - "एक बार महादेवी के पिता से युद्ध करते
समय भी तो हमने इसी उपाय से काम लिया था । याद है न, महाराज ?"
     "सब कुछ याद है, वीरसेन!" सम्राट चन्द्रगुप्त ने धीमे स्वर में कहा और फिर अतीत के धुँधलकों
में खो गए ।

(i) वीरसेन कौन है ? यहाँ वह किस उपाय की बात कर रहा है ? [2]

(ii) उक्त उपाय का समर्थन करते हुए वीरसेन ने क्या कहा था ? [2]

(iii) युद्ध की स्तिथि पर इसका क्या प्रभाव पड़ा ? [3]

(iv) प्रस्तुत प्रसंग के आधार पर सिद्ध कीजिए कि चन्द्रगुप्त सफल सम्राट ही नहीं कुशल सेनपति भी था । [3]

Question 10
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"हमें युवराज न कहिए, गुरुदेव! आज चन्द्रगुप्त की स्तिथि वही है जो मगध के एक साधारण नागरिक
की है ।" चन्द्रागुप्त ने दुःखी स्वर में कहा - "फिर भी आप विश्वास रखिए, मगध चन्द्रगुप्त का है और
रहेगा । और केवल मगध ही क्यों, सारा भारतवर्ष उसका है । वह सारे भारत का है । जब तक शरीर
में प्राण हैं, वह विदेशियों को भारत की पवित्र भूमि पर पाँव न रखने देगा ।"

(i) गुरुदेव कौन हैं ?  इससे पूर्व उन्होंने चन्द्रगुप्त से क्या कहा था ? [2]

(ii) मगध की दशा में क्या परिवर्तन हुआ था ? [2]

(iii) मगध की दशा सुधारने के लिए चन्द्रगुप्त विद्रोह क्यों नहीं करना चाहता था ? [3]

(iv) ’वीरों के लिए राज-सिंहासनों की कमी नहीं होती’-प्रस्तुत पंक्ति को आधार बनाकर एक अनुच्छेद में अपने विचार दीजिए । [3]

Question 11
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"कुमार सहब, जो तात्या टोपे नहीं कर सके, नाना नहीं कर सके वह राजा कुंवरसिंह और
अमरसिंह ने कर दिखाया । आठ महीने हुए, मैंने दानापुर मे सिपाहियों के सामने जो शपथ आप दोनों
भाँईयों को दिलवाई, वह आज पूरी हुई ।"

-विजय की बेला-

लेखक - जगदीशचन्द्र माथुर



(i) वक्ता कौन है ?  उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए । [2]

(ii) वक्ता ने दोनों भाईयों को कौन-सी शपथ दिलवाई थी और क्यों ? [2]

(iii) तात्या टोपे और नाना साहब कौन थे ?  भारतीय इतिहास में वे अमर क्यों हैं ? [3]

(iv) प्रस्तुत एकांकी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए । [3]

Question 12
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"मैं अपनी ओर से कोई कसर न उठा रखूँगा, डॊक्टर साहब! सुरेन्द्र, देखो तुम मेरे पास
रहना, जाना नहीं, यह घर इस ब्च्चे के लिए विराना है । ये लोग इसकी ज़िन्दगी नहीं चाहते । बड़ा
बड़ा रिश्ता पाने के रास्ते में इसे रोड़ा समझते हैं ।"

- लक्ष्मी का स्वागत -

लेखक - उपेन्द्र नाथ अश्क



(i) वक्ता कौन है ? उसका सुरेन्द्र के साथ क्या सम्बन्ध है ? [2]

(ii) वक्ता के दुःख का क्या कारण क्या था ? [2]

(iii) वक्ता ने ’ये लोग’ किन्हें कहा है ? वे ब्च्चे के दुश्मन क्यों बन गये थे ? [3]

(iv) ’धन के लोभी मनवता के लिए कलंक होते हैं ।’ एकांकी के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए । [3]

Question 13
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

"मैं कहता हूँ नीरू ! पढ़ाई में समय दो । पढ़ना जरूरी है । बिना पढ़े जिन्दगी में कुछ मिलने वाला
नहीं है ।"
     आप तो हमेशा यही उपदेश देते रहते हैं । आपको क्या इतनी चिन्ता है हमारी पढ़ाई की । अब हम
बच्चे थोड़े ही रह गए हैं । अपना भला-बुरा खूब समझते हैं ।

- भटकन -

लेखक - शैल रस्तोगी



(i) प्रस्तुत वार्ता क समय और स्थान बताइए । [2]

(ii) इससे पूर्व नीरू कहाँ गई थी और क्यों ? [2]

(iii) नीरू को उपदेश देने वाला व्यक्ति कौन है ? उसकी इस सलाह से आप कहाँ तक सहमत हैं ? [3]

(iv) बच्चों के अनुचित व्यवहार पर माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ? अपने विचार दीजिए । [3]

Question 14
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

अरुण, यह मधुमय देश हमारा !
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को, मिलता एक सहारा ।
सरस तामरस गर्भविभा पर, नाच रही तरू-शिखा मनोहर,
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा ।
अरुण, यह मधुमय देश हमारा !

- अरुण यह मधुमय देश हमरा -

कवि - जयशंकर प्रसाद



(i) कवि ने हमारे देश को कैसा बताया है और क्यों ? [2]

(ii) अनजान क्षितिज को सहारा मिलने का क्या तात्पर्य है ? [2]

(iii) हरियाली पर जीवन कब और किस प्रकार छिटकता है ? [3]

(iv) निम्न शब्दों के अर्थ लिखिए :-
कुंकुम, सरस, तामरस, विभा, अरुण, क्षितिज ।
[3]

Question 15
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

'चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति विघ्न जो पड़े उन्हें ढकेलते हुए ।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पन्थ के सतर्क पान्थ हों सभी ।
वही समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे ।

- मानवता -

कवि - मैथिलीशरण गुप्त



(i) 'अभीष्ट मार्ग’ से आप क्या समझते हैं ? उस पर किस प्रकार बढ़ना चाहिए ? [2]

(ii) हेलमेल को न घटने देना और भिन्नता को न बढ़ने देना क्यों आवश्यक है ? [2]

(iii) ’समर्थ भाव’ से जीना किसे कहते हैं ? यह भाव मनुष्यता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ? [3]

(iv) प्रस्तुत कविता को पढ़कर आपको क्या प्रेरणा मिली ? [3]

Question 16
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

देखी पवनसुत पति अनुकूला । हृदयँ हरष बीती सब सूला ।।
नाथ सैल पर कपिपति रहई । सो सुग्रीव दास तव अहई ।।
तेहि सन नाथ मयत्री कीजे । दीन जानि तेहि अभय करीजे ।।
सो सीता कर खोज कराइहि । जहाँ तहँ मरकट कोटि पठाइहि ।।
एहि बिधि सकल कथा समुझाई । लिए दुऔ जन पीठी चढ़ाई ।।
जब सुग्रीव राम कहूँ देखा । अतिसय जन्म धन्य करि लेखा ।।
सादर मिलेउ नाइ पद माथा । भेंटेउ अनुज सहित रघुनाथा ।।
कपि कर मन विचार एहि रीति । करिहहि बिधि मो सन ए प्रीति ।।

- राम-सुग्रीव-मैत्री -

कवि - तुलसीदास



(i) पवनसुत कौन हैं ? श्रीराम को अपने अनुकूल पाकर उन्हें कैसा अनुभव हुआ ? [2]

(ii) उन्होंने श्रीराम से क्या प्रार्थना की और क्यों ? [2]

(iii) वे श्रीराम को किस प्रकार, कहाँ ले गये और क्यों ? [3]

(iv) ’कठिन से कठिन संकट भी मित्र की सहायता से दूर किया जा सकता है ’ - प्रस्तुत संदर्भ को आधर बनाकर एक अनुच्छेद में अपने विचार दीजिए । [3]